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हम सोचते हैं (भाग 10) – पुलिस की छवि

शुरु करने के पहले ही आपको यह बताना चाहेंगे कि हम बचपन से ही पुलिस वालों के जबरदस्त फैन रहें हैं। हमारे सबसे पसंदीदा पुलिस अफसरों में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, शत्रुघन सिन्हा, अक्षय कुमार, सलमान खान और अजय देवगन जैसे अभिनेताओं के द्वारा निभाए गए किरदार शामिल हैं। सिंघम से तो हम इतना प्रभावित हैं कि दोनो फिल्में कम से कम दस बार देखी होंगी। इन किरदारों से प्रभावित होना स्वाभाविक है – ये ईमानदार, कर्मठ और अच्छाई के प्रतीक के रूप में उभर कर आते हैं।
आप सोच रहे होंगे कि एक तो मुआ एक साल बाद कुछ लिख रहा है और वो भी पुलिस पर – कुछ और विषय नही मिला। लिखने के पीछे एक घटना रही। हम खाने के लिए बाहर निकले हुए थे – हमारी ‘बेटर हॉफ’, हमारा भाई, हम और एक मित्र का परिवार। मित्र का बेटा अभी मात्र ढाई साल का हैं और अपनी उम्रानुसार शैतानियाँ करने से बाज नही आता। उसे बस में करने के लिए हमारी बीवी कभी कभी उसे पुलिस की झिड़की दे देती है – उस रोज भी कार पार्क करते समय ये प्रकरण चल रहा था कि साक्षात बाईक सवार दो पुलिसवाले दिख लिए। देखते ही मौजूद दोनो ‘लेडिज’ ने उन पुलिसवालों से बच्चे को डराने का निवेदन किया। …
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An Open Letter to Indian Railways

Dear Sir,
I should have ideally written this mail three weeks back when the incident, which forced me to write this, took place. Multitudes of reasons held me from accomplishing this simple task in the in between period – however, as the saying goes, it is better late than never. Before I start narrating the incident it is my duty to inform you that this mail is drafted with the assumption that Indian Railways is a Service Provider and its performance should be measured against the set benchmarks for the service industry.


As already pointed out that the incident took place some 3 weeks back while I was traveling from Howrah to Ranchi (Train: Howrah Hatia Express; Date: 22nd September 2014; PNR: 6232595064) along with my parents. It started as a normal journey (the train started a few minutes late… nothing unusual by Indian standards) and would have remained so had we not faced the unexpected. As we pulled out our bags from under the lower berth we found, to our horror, that my bag had b…

Patna, Can we have this campaign?

I think my native city, Patna, needs a surgery. You may question my wisdom and have every right to do so – after all Patna of today is much different from Patna of a decade back. There are several projects which, once completed, have the potential to change the face of Patna. And yet I cry for an operative procedure to rescue the city I love (actually it needs many significant treatment sessions but I would raise one important issue in this post).
Consider these news items:
According to a WHO study, Patna is the 2nd most polluted city in the world next only to DelhiThis summer, for a considerable period, Patna (in fact the entire Bihar) recorded some of the highest temperatures in the country
The quality of air in Patna has deteriorated at an alarming rate. Patna, as far I remember, was always a city with dusty roadsides but the rapid spree in construction (massive projects like Roads, Flyovers, bridges, Museum, Convention Center, Malls etc.) has taken its toll on the quality of air. Ad…

हम सोचते हैं (भाग 9) – अच्छे दिन

सुबह घर से बाहर निकले तो हवा को बदला हुआ पाया – आज वह मलिन नहीं थी; न ही दम घोटने को लालायित। हमें आश्चर्य हुआ; कारण जानने की इच्छा भी हुई। उसे रोक कर पूछा – ‘ओ बावली, क्या हो गया है तुझे? आज इतनी निर्मल, इतनी स्वच्छ कैसे है? आज मुझे परेशान करने का मन नही कर रहा?’
इसपर वह मुस्कराई, इठलाई और कहा – ‘अब से तो मैं ऐसी ही रहूँगी। मसीहा का आदेश है। अच्छे दिन आ गए हैं।’ इतना बोल वह चलते बनी पर हमें स्तब्ध कर दिया। ‘अच्छे दिनों’ की इतने जल्दी आने की उम्मीद हमें कतई नही थी। संशय में तो हम थे पर होंठों पर एकाएक हँसी आ गई। ख्याल में आया कि चलो इस लहर में कुछ तो ठीक हुआ।
कॉलोनी में शायद ही कोई हमें पहचानता होगा (सुबह निकलकर देर रात लौटने वाले का सामाजिक अस्तित्व नगण्य होता है) पर हम अनेकों से वाकिफ है। बगलवाली आँटी जो हर रोज सड़क पर कूड़ा फेंकती थी, आज डस्टबीन का प्रयोग करते नजर आईं। हमसे ज्यादा आश्चर्यचकित तो कूड़ावाला था जिसे वे मंद मंद धमकी दे रहीं थी– ‘अगर आज से इस पूरी कॉलोनी में एक जगह भी कचरा मिला तो तेरी खैर नही। मसीहा के आदेश के उल्लंघन में तुझे पिटवा दूँगी।’ कूड़ावाले ने जहाँ हामी में सर भर ह…

हम सोचते हैं (भाग 8) – होली है!!

लीजिए भई, होली आ गई। जो हमें जानते हैं उन्हें पता है कि यह हमारा सबसे पसंदीदा त्योहार है। बचपन से ही इस त्योहार नें हमें अपने आकर्षणपाश में बाँध रखा है और अभी तक हमारा इससे मोहभंग नही हुआ है। हमारे ज्यादातर मुख्य त्योहार बुराई पर अच्छाई के जीत के प्रतीक हैं और होली कोई अपवाद नही है। जिन बंधुओ के लिए किवदंतियाँ/ मिथक (बहुतों के लिए इतिहास भी) कमजोर कड़ी है उनके लिए बता देते हैं कि होली का नाम ‘होलिका’ नामक राक्षसी से आया है। जब हम होलिका दहन मनाते हैं तो हम सांकेतिक रूप में होलिका रूपी दुष्टता को जलाते हैं। होली का त्योहार भक्त प्रह्लाद की भक्ति का; उसे बचाने के लिए होलिका के नाश का एवं उसके पिता (और दुष्ट असुर राजा) हिरण्यकश्यप के अत्याचारी शासन के अंत का उत्सव है। पर यह उत्सव रंगों के साथ क्यों खेला जाता है? भगवान राम जब अयोध्या वापस आए तब भी उत्सव मना पर वह प्रकाशोत्सव था रंगोत्सव नही। तो फिर होली पर रंग क्यों?
एक धारणा है कि होली में रंग का समागम भगवान कृष्ण ने किया – राधा एवं अन्य गोपिकाओं के साथ उनका रंगरास होली के रूप में प्रसिद्ध हुआ। दरअसल कृष्ण अपने श्याम रंग से असंतुष्ट थे और …

हम सोचते हैं (भाग 7) – इंद्रधनुष

हाल ही की बात है – हम अपने घनिष्ठ मित्र के विवाह समारोह में सम्मिलित होकर बेंगलुरु (हम अभी भी बैंगलोर कहना ही पसंद करते हैं) से दिल्ली वापस लौटे थे। मध्यरात्रि में जब हमारा विमान दिल्ली की हवाईपट्टी पर उतर गया तो हमने उन शक्स को फोन मिलाया जो हमें नियमित रूप से टैक्सी सेवा प्रदान करते हैं। पता चला कि ड्राइवर से बात न हो पाने के कारण हमारी टैक्सी आ नही पाएगी - अत: हमें अपना इंतजाम इस बार स्वयं ही करना पड़ेगा। यह कोई मुश्किल कार्य नही है और एयरपोर्ट में काफी टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे हमारे जेब पर कुछ ज्यादा ही भारी पड़ती हैं। खैर मध्यरात्रि में और कोई चारा भी नही था सो हमने दिल्ली पुलिस द्वारा उपलब्ध करायी गई टैक्सी सेवा ले ली।
अधिकतर महानगरों में रिक्शे और टैक्सी चालकों की एक महत्वपूर्ण संख्या बिहारियों की होती है – दिल्ली उसमें कोई अपवाद नही है और शायद यहाँ ये प्रतिशत कुछ ज्यादा ही होगा कम नही। हमारे द्वारा किए गए टैक्सी का चालक भी बिहारी था।
‘कहाँ से हैं आप?’ हमने पूछा। ‘जी, बिहार से।’ ‘वह तो पता चल गया। बिहार में कहाँ से?’ ‘बाँका।’ ‘हम पटना से हैं।’
हमारे साथ एक प…